(मनोज जायसवाल)
– कांकेर विधायक की इन दिनों वायरल वीडियो फोटो लोकप्रियता के लिए दिखावे की नहीं अपितु खुद की आम जिंदगी से जुडा हुआ है।
ये हैं,हमारे कांकेर विधायक आशा राम नेताम,जिनकी अपनी माटी से प्रेम के किस्से की सशक्त बानगी है। छत्तीसगढ के ”लोकजीवन” में यह लोक गीत जिसे फिल्म,एल्बम ‘रघुबीर’ का गीत है,जिसे छत्तीसगढ के सुनील सोनी,ममता चंद्राकर,अनुज शर्मा जैसे सुप्रसिद्व कला साधकों ने आवाज दी है। हालांकि यह एक विदाई गीत है,जिसमें मां अपने बेटे से यह कहती है,कि देश में जो भी स्थिति परिस्थिति आए अपनी जन्मभुमि को कभी मत छोडना। गीतों की एक पंक्ति पर नजर डाली जाय तो…

ये भुईंया के लालन बेटा तैं तो सिधवा लाल रे
इहे करम हे,इहे धरम हे,इहे गंगा धाम रे
डोरी झन टूटे रे संगी, बंधना झन टूटे रे संगी
भुंईया के रिसता निभाना…..
सच ! कांकेर विधायक जिनकी संघर्ष की दास्तान शायद आपने भी देश के राष्ट्रीय अखबारों या इलेक्ट्रानिक चैनलों पर जरूर देखी पढी होगी। बालपन से संघर्ष की वे ऐसा उदाहरण बने रहे कि कभी हौसला डिगने नहीं दिया। जिंदगी ने कई इम्तिहान लिये लेकिन वे चलते रहे। नरहरपुर क्षेत्र के साप्ताहिक बाजारों में एक छोटा सा धंधा किया करते,जिससे परिवार की आजीविका चलती थी। पिता हमेशा इनके साथ साया की तरह रहते। खुद की कुछ कृषि भुमि जिसमें अधिकाधिक मेहनत करने की जरूरत थी,को जी तोड पसीना बहाकर मेहनत किया। खेतों को समतल करने के लिए खुद पिता का साथ देते।

भारतीय जनता पार्टी के वे कर्मठ,निष्ठावान,ईमानदार कार्यकर्ता रहे। आजीविका के लिए धंधा भी करते और जनसेवा भी फिर खेती बाडी भी। यही कारण है कि जो खेत आज समतल नहीं है,उसे आज कांकेर के तात्कालीन विधायक होते हुए भी कर्म पर विश्वास को लेते हुए काम करते नजर आते हैं। पिछली दो कडियों में हम उनके द्वारा खेतों में दवाई,खाद छिडकते,जनसेवा के नाम सफाई करते तो ट्रेक्टर से जैविक खाद को डालकर परिवहन करते चित्र सहित बताने का हमने प्रयास किया।

अब यह चित्र आज का वो ताजा चित्र है,जिससे सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है। आज उनके अंगना कार्यालय में मिलने वालों की तादात तो थी,पर यहां के किसी कर्मचारी को भी भनक तक लगने नहीं दिया कि वे खेतों पर काम कर रहे हैं। बताते चलें संघर्ष के दौर में जितनी इन्होंने गरीबी को नजदीक से देखा है,बाजार के अन्य व्यापारियों को भी संघर्ष की प्रेरणा देते हुए हौसला बुलंद रखने की सीख देते। कांकेर के विधायक बनने के बाद भी वे उसी साप्ताहिक बाजारों में जाकर व्यापारियों,आम लोगों से मुखातिब होते उनकी तकलीफों को सुनते दूर करते नजर आते हैं। कांकेर विधानसभा का प्रमुख नरहरपुर मुख्यालय में साप्ताहिक बाजार दिवस पर जनदर्शन के माध्यम समस्याएं दूर करते नजर आते हैं,तो गृहग्राम बेंवरती अंगना कार्यालय में रोज जनदर्शन लगता है,जहां आगंतुकों का चाय,पानी,जलपान के साथ स्वागत करते यह प्रयास किया जाता है कि कोई यहां से निराश होकर ना जावे। हाईटेक सुविधाओं से लेस इस कार्यालय की हर कोई प्रशंसा किये बगैर नहीं रह सकता।

कांकेर विधानसभा में निर्माण कार्यों की फेहरिस्त तो इतनी है कि यहां गिनाना संभव नहीं है। करोडों की सौगात विभीन्न निर्माण कार्यों के लिए जहां स्वीकृति करायी गई है,तो सडक पुल पुलिया जैसे कई कार्य वर्तमान में जारी है।

जैसा कि अमुमन यह होता आया है कि कई लोग मात्र अपनी लोकप्रियता के नाम पर आज रील बनाया जाता है,अखबारों की सुर्खिया बनते हैं,लेकिन सहज,सरल,मिलनसार कांकेर विधायक आशा राम नेताम का जो फोटो या रील वायरल हो रहा है,वह वो धरातलीय सच है,जिसके लिए आपको खुद उनसे मिलेंगे तो आशा के साथ पूर्ण विश्वास जगेगा। निश्चित रूप से आप कांकेर जिले ही नहीं अन्य क्षेत्र के भी है,तो मिलकर देखिये। हां, एक और बात जरूर बता दें कि आशा राम नेताम से मिलने के लिए किसी माध्यम,पीए पर्ची की जरूरत भी नहीं है!






