डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की पुस्तक “भुइयाँ के भगवान” विमोचित

(मनोज जायसवाल)

—कुल 146 पृष्ठ की यह कृति छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित होने वाली डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की द्वितीय पुस्तक है।

रायपुर (सशक्त पथ संवाद)। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के स्थापना दिवस के अवसर पर दिनांक 28 नवम्बर 2025 को संस्कृति विभाग रायपुर के सभागार में 13 साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन सम्पन्न हुआ। इस दौरान डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति, साहित्य वाचस्पति की 68वीं कृति – “भुइयाँ के भगवान” कविता-संग्रह का विमोचन मुख्य अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल के हाथों से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान विधायक द्वय पुरन्दर मिश्रा एवं अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के अध्यक्ष शशांक शर्मा, फिल्म अभिनेत्री मोना सेन, संचालक राजभाषा आयोग   आचार्य एवं सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ साहित्यकार, कलाकार, विद्वान एवं साहित्य जगत से जुड़े हुए लोग उपस्थित रहे।

पुस्तक विमोचन के अवसर पर कहा गया कि – छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तक – भुइयाँ के भगवान कविता संग्रह डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति के 68वीं पुस्तक आय। एमा खेती किसानी करे म जतेक मेहनत लागथे अउ पछीना बोहाय बर परथे, तेकर कविता के रूप म बरनन हावै। संसार के जम्मो हँसी-खुसी, सुख-सुबिधा अउ बिलास ह नागर के नोक ले निकलथे। अगास म उड़इया पंछी ले लेके पानी के जीव-जन्तु तको ह किसान के मेहनत के भरोसा म रइथें। एमा पर्याबरन संरकच्छन के सन्देस घलो देहे गय हे। ए सबो खातिर भुइयाँ के भगवान पुस्तक ह अब्बड़ गियानवर्धक, प्रेरक अउ उपयोगी हावै।

कुल 146 पृष्ठ की यह कृति छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित होने वाली डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की द्वितीय पुस्तक है। गत वर्ष उनकी 55वीं कृति – कठवा – कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ था, जो काफी चर्चित रहा और लोक सेवा आयोग सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सामान्य अध्ययन की पुस्तकों में शामिल था। पुस्तक विमोचन के दौरान डॉ किशन को मैटल की उत्कृष्ट क्वालिटी की प्रशस्ति पट्टिका प्रदान कर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। ज्ञातव्य है कि डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की अब तक 72 पुस्तकें विभिन्न विधाओं – कविता, कहानी, लघुकथा, उपन्यास, समीक्षा संग्रह, हास्य व्यंग्य, संस्मरण, यात्रा संस्मरण इत्यादि विधाओं में प्रकाशित हो चुकी है। वे प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध वरिष्ठ साहित्यकार हैं।

डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति को इस उपलब्धि के लिए जुगेश बंजारे धीरज, डॉ. गोवर्धन मार्शल, विवेक तिवारी, सुरजीत टण्डन, चतुरसिंह चंचल, मनोज जायसवाल, श्रीमती रानी राणा, डॉ. राखी कोर्राम, गरिमा पोयाम, हजारी लाल कुर्रे, राजेन्द्र कश्यप, सुरेश चन्द्रा, खिली प्रसाद मधुकर, बुंदराम जांगड़े, कार्तिक पुराण घृतलहरे, रमेश कुमार रसियार, ओमप्रकाश पात्रे ओम, सुश्री माधुरी मार्कण्डेय, श्रीमती रंजीता कुर्रे, मनोज मनहरे, राम सूरत भारद्वाज, भरत बर्मन, रामायण सूर्यवंशी सहित परिजनों, मित्रों, प्रशंसकों एवं छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के सभी साथियों ने बधाई देते हुए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की है।

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