(मनोज जायसवाल)
-जिले के प्रत्येक नागरिक का दायित्व बनता है,कि अपने जिले में सृदृढ कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये रखने की दिशा में कर्तव्य मानकर सहयोग किया जाना।
आम तौर पर जिला प्रशासन को किसी अव्यवस्था पर बातों बातों में कोसना और जिम्मेदार ठहराना सरल हो गया है। आजकल सोशल मीडिया के दौर में मंत्री से लेकर जिला प्रशासन को उन छोटी बातों पर भी लोग कोसते नजर आते हैं,जैसे कि देश के साथ स्थानीय लोकजीवन में उनका कोई कर्तव्य नहीं है! प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए कि आपके अपने जिले में व्यवस्था सृदृढ रहे इस हेतु प्रशासन को सहयोग किया जाना।आज वो लोग भी सीधे रूप से बगैर किसी तरह विचार किए प्रशासन को कोस रहे हैं,जिन्हें प्रशासन के संबंध में कुछ नहीं मालूम।
कैसे जब बाढ की स्थिति आती है, कोई बहने वाला हो तब उनका हाथ ना थाम कर रील बनाने में ध्यान दिया जाता है,उस रील में जिला प्रशासन को पंगु,कमजोर और ना जाने क्या-क्या नामों से कोसा जाता है,जबकि चाहते तो किसी बह रहे व्यक्ति का जीवन बचाना खुद का नैतिक उत्तरदायित्व है,चाहे आप पत्रकार रहें या प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी या फिर आम आदमी। जब प्राकृतिक आपदाएं विकराल रूप से सामने खडी हो उस वक्त भी प्रत्येक जन का दायित्व है कि वो प्रशासन को व्यवस्था के लिए सहयोग करे।
व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का कार्य ही प्रशासन है। यहां नीतियों का निर्माण नहीं अपितु बनाये गए नियमों का परिपालन करना है। भौतिक एवं मानवीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संगठन,नियोजन,निर्देशन,नियंत्रण करना प्रशासन है। समय-समय पर विधानसभा,लोकसभा,स्थानीय निकाय चुनाव करवाना, कानुन एवं शांति व्यवस्था बनाये रखना,भु-राजस्व एकत्र करना, ग्रामीण एवं नगरीय जनता का कल्याणार्थ कार्य जिला प्रशासन का है।
जिला प्रशासन का मुखिया जिले का कलेक्टर या जिला दण्डाधिकारी होता है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जो जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था,राजस्व प्रशासन के साथ विकास कार्यों को देखता है। डीएम के ऊपर संभाग आयुक्त यानि कमिश्नर और सरकार के वरिष्ठ सचिव होते हैं। हालांकि जिले में प्रशासनिक,पुलिस कानून शांति व्यवस्था के मामलों पर कलेक्टर ही शक्तिशाली होता है।






