(मनोज जायसवाल)
-अतीत से चली आ रही परंपराओं का बेहतर निर्वहन अरौद ऐतिहासिक दशहरा उत्सव में देखा जा सकता है।
कांकेर(सशक्त पथ संवाद)। जिले का अरौद(चारामा)ऐतिहासिक दशहरा उत्सव आज 21 अक्टूबर को मनाया जायेगा। आयोजन के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। आयोजन का यह 87 वॉं वर्ष होगा,जहां इस बार बृजमोहन अग्रवाल सांसद एवं पूर्व मंत्री छ.ग.शासन मुख्य अतिथि के रूप में होंगे तो भानुप्रतापपुर क्षेत्र की विधायक श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रमुख रूप से उपस्थित होंगी। कार्यक्रम शाम 5 बजे से शुरू होगी जो रात्रि 9.30 को सम्पन्न हो जायेगी। इसके बाद रात्रि 10 बजे से लोककला सांस्कृतिक मंच गरियाबंद की प्रस्तुति ‘‘सुरता” की प्रस्तुति होगी। दूर के लोगों के लिए यु—ट्यूब के माध्यम भी देख सकते हैं।

विगत दो महीने पूर्व से ही प्रति वर्ष अरौद दशहरा उत्सव की शुरूआत हो जाती है। पूरी तरह गांव के संसाधन,गांव के कला जगत के कलाकारों द्वारा उत्सव को मूर्त रूप दिया जाता है। रावण के पुतले की बात करें तो यह पूरी तरह इलेक्ट्रानिक पद्वति से लेस होता है। पुख्ता पुलिस व्यवस्था होने के चलते कार्यक्रम में आज तक कभी व्यवधान नहीं आया है।
राम लीला मंचन में राम रावण युद्व के आखिरी चरण में राम द्वारा इसे वध किया जाता है। पूरी तरह इलेक्ट्रानिक पद्वति से दहन होने के चलते ही लोगों में इस कलाकारी को देखने की इच्छा होती है, यही कारण है कि आज यह कांकेर जिला अपितु प्रदेश स्तर तक इसकी ख्याति फैल चुकी है,लोग दूर-दूर से अरौद ऐतिहासिक दशहरा का आनंद लेने आते हैं।
चारामा विकासखंड के स्वावलंबी कहे जाने वाले अरौद प्रतिभाओं का गांव कहा जाता है। मेहनतकश लोगों के चलते शिक्षा,स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के क्षेत्र में यह अपनी पहचान बना चुका है। इस ग्राम के कई सपुतों ने सीमा पर देश की रक्षा में तो कई उच्च शासकीय क्षेत्रों में सेवारत है।
गांव का संसाधन,गांव के प्रतिभाओं की कलाकारी और योगदान के चलते बगैर किसी शासकीय सहयोग के यह कार्यक्रम सम्पन्न होता है। अतीत से चली आ रही परंपराओं का बेहतर निर्वहन यहां देखा जा सकता है। ऐतिहासिक दशहरा के इस मंच पर छत्तीसगढ की कई नामचीन सांस्कृतिक मंचों ने यहां प्रस्तुति दिया है। इस वर्ष भी गरियाबबंद का मंच सुरता की प्रस्तुति होगी। जितनी भीड रावण दहन के बीच देखने मिलती है,उतना ही भीड दशहरा उत्सव की रात्रि भर होती है। लखनपुरी,नरहरपुर,चारामा,कांकेर चहूंओर की सडकें अरौद आवाजाही करने वालों की होती है। प्रति वर्ष छत्तीसगढ शासन के प्रतिनिधि अतिथि के रूप मे उपस्थित होते हैं। लोगों को हर वर्ष अरौद ऐतिहासिक दशहरा का इंतजार होता है। आज अरौद पूरी तरह दुल्हन की तरह सजायी गई है‚ आयोजन सार्वजनिक जरूर है‚ पर निजी रूप से सगे संबंधियों स्वागत भी वंदन प्रत्येक घरों में देखा जा सकता है।






