पत्रकारिता में चुनौतियां रहेंगी पर मुकाबला के लिए एकजुटता जरूरी

(मनोज जायसवाल)

—मीडिया जगत में नवोदित पत्रकारों को प्रोत्साहन देना आवश्यक।

रायपुर(सशक्त पथ संवाद)। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर सपोर्ट जर्नलिस्म मुहिम के अंतर्गत रायपुर प्रेस क्लब, मोतीबाग में पत्रकार समागम का आयोजित किया गया जिसमें विशिष्ठ अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार , साहित्यकार गिरीश पंकज, शशि परगनिहा व सेवानिवृत्त आईएएस , कॉलमिस्ट , साहित्यकार बी.के.एस रे शामिल हुए , अतिथियों द्वारा राजधानी के इलेक्ट्रानिक मीडिया के रिपोर्टर, वीडियो जर्नलिस्ट्स, एंकरों, प्रिंट मीडिया के रिपोर्टर्स, फोटो जर्नलिस्ट्स तथा चयनित इंटरनेट पत्रकारों सहित सौ से अधिक सक्रिय मीडिया कर्मियों को शाल, श्रीफल,स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

चित्र—आयोजन में अपनी बात रखते वरिष्ठ पत्रकार पी.सी. रथ।

सपोर्ट जर्नलिस्म मुहिम की शुरुआत 03 मई 2025 को रायपुर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के दिन से शुरू की गई है जिसके बारे में सुधीर आज़ाद तम्बोली ने जानकारी देते हुए बताया कि सपोर्ट जर्नलिस्म मुहिम के माध्यम से निर्भीक पत्रकारों को समर्थन, सहयोग देकर पत्रकारिता के पक्ष में सभी को खड़े होने के लिए अपील की जाएगी और लोकतंत्र में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का आव्हान किया जाएगा क्योंकि पत्रकारिता से लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता में ही जनता का हित समाहित है। वर्तमान समय में पत्रकारों के समक्ष अनेक चुनौतियां है, इन वर्षों में पत्रकारों के दमन के अनेक मामले सामने आ रहे है, जिससे संगठित रूप से ही लड़ा जा सकता है और जनसरोकार, जनपक्षीय खबरों के लिए खतरा मोल लेने वाले पत्रकारों के पक्ष में जनता का, सर्व समाज का आना बहुत जरूरी है जिससे पत्रकारों का हौसला कमजोर न पड़े। सपोर्ट जर्नलिज्म अभियान इसे ही गति देने शुरू किया गया है। मुख्य अतिथि गिरीश पंकज ने देश में पत्रकारिता के इतिहास से ले कर आज तक की परिस्थितियों की विस्तार से जानकारी दी, उन्होंने बदलते दौर में पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों को समझने की जरूरत बताई, गणेश शंकर विद्यार्थी जी के अखबार प्रताप में शहीद भगतसिंह पत्रकारिता करते थे, गांधी जी की पत्रकारिता किस तरह दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के बाद लगातार जारी रही, भले ही उन्हें कितनी बार जेल जाना पड़ा।

चित्र—इस अवसर पर मीडिया कर्मियों को सम्मानित किया गया।

विशेष अतिथि बीकेएस रे ने अपने लेखन कर्म के बारे में बताया , किस तरह प्रशासनिक पद पर रहते हुए वे निरंतर साहित्य सृजन, हिंदी अंग्रेजी दैनिक अखबारों में सामयिक विषयों पर कॉलम लिखते रहे, बताया।रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव डॉ वैभव सिंह पांडे ने आज पत्रकारों के सम्मुख चुनौतियों के बारे में बताते हुए , एकजुटता होने पर सफलता का रास्ता बताया। उन्होंने संघर्षों से घबराए बिना निरंतर काम करने का रास्ता बताया। वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि परगनिहा ने भी अन्य अतिथियों के साथ आमंत्रित पत्रकारों को सम्मानित किया ।

चित्र— मीडियाकर्मी आयोजन  से ही एका होने का संदेश देते हुए

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पी सी रथ ने किया, उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू पत्रकारिता के प्रभावी योगदान के बारे में बताया। “पयाम ए वतन” के सभी संपादकों को फांसी, बंदूक की गोली या तोप में बांध कर उड़ा दिया जाता था। दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन में प्रताप , गणेशशंकर विद्यार्थी, लोकमान्य तिलक  के अखबार जैसे दर्जनों ने अपनी भूमिका निभाई।

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