(मनोज जायसवाल)
– बस्तर को ब्लेक आउट किया गया था,जो आज भी लोगों के जेहन में है। अब कभी ऐसी समस्या से जुझना नहीं पडेगा।
कांकेर(सशक्त पथ संवाद)।नक्सलवादियों के बस्तर में पैर पसारने के बाद कई बार आम लोगों को संकटों से जुझना पडा। ऐसा ही एक संकट था जब वर्ष 2007 में बीजापुर जिले के कोंडापल्ली,दंतेवाडा सीमा पर कर्राकोडर में उच्च क्षमता के टावर को विस्फोट कर गिरा दिया, इससे पूरा बस्तर में ब्लेक आउट हो गया। ऐन गर्मी के वक्त इस प्रकार की घटना से खुद नक्सलवादियों के संगठन से जुडे लोगों को भी परेशानियों से जुझना पडा।

तब एंड्रायड मोबाईल का जमाना नहीं था, की पेड वाली मोबाईल से बात किया करते थे। बात हो जाता पर मोबाईल में बैटरी की समस्या नहीं रहती। इस घटना के बाद सरकार ने त्वरित संज्ञान लेकर पूरी ताकत झोंक दी। इस अवधि में लोगों का एकमात्र संचार साधन अखबार था,जिसके चलते पता चलता कि आज कितना काम हो गया, कब तक लाईन बहाल हो सकती है। इस समय जनरेटर की बिक्री भी खुब हुई। बडे बडे आर्थिक सम्पन्न लोग जनरेटर ले लिये। बस्तरवासियों ने तब काफी धैर्य रखा। शासन प्रशासन अतिआवश्यक कार्य हेतु कार्यालयों के लिए बडी बडी जनरेटर भेजा गया था।
तब तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बस्तर के इस बडी समस्या को देखते हुए एक और हाईटेंशन पैरलर टॉवर लाईन की घोषणा कर दी। जिसके बाद कहा गया कि इस अब बस्तर कभी ब्लेक आउट नहीं हो सकता। ऐसा हुआ भी पैरलर लाईन बिछाई गई। पैरलर लाईन के बिछाने में कई जगह जमीनी परेशानियां आई पर बहुत अल्प समय में इसे पूरी कर ली गई।
बस्तर में इस टॉवर को नक्सलवादियों द्वारा गिराये जाने के महज कुछ दिनों पर टॉवर खडी कर ली गई और बिजली बहाल की गई, तब जाकर बस्तवासियों को चैन मिला। इधर जो पैरलर लाईन बस्तर तक केशकाल होते बिछायी गई निश्चित ही अब भविष्य में बस्तर को पूरा ब्लेक आउट जैसी समस्या से जुझना नहीं पडेगा। पैरलर लाईन बिछायी जाने के बाद आज बस्तर बिजली के संदर्भ चाहे कोई भी क्षेत्र हो पिछडा नहीं है। 31 मार्च को देश के गृहमंत्री द्वारा देशवासियों को किया आश्वस्त पूरा हो गया। अब वो ब्लेक आउट का दिन कभी देखने नहीं मिलेगा पर जेहन में याद आज भी है।






