(मनोज जायसवाल)
– मीरा आर्ची चौहान की 50 साझा संग्रह प्रकाशित हो चुकी है। उल्लेखनीय योगदान के लिए 300प्रमाण पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है।
कांकेर(सशक्त पथ संवाद)। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डुमाली में 16वर्षाे तक व्याख्याता पंचायत व व्याख्याता( एल. बी.) रसायन शास्त्र के पद पर कार्यरत रही मीरा आर्ची चौहान को प्राचार्य बनने पर स्टॉफ व बच्चों द्वारा ससम्मान विदाई दी गई।इस अवसर पर प्राचार्य अर्चना शुक्ला के अलावा सेवानिवृत व्याख्याता केशर लोन्हारे व समस्त स्टॉफ व बच्चे उपस्थित थे।मंच संचालन करते हुए कार्यालय स्टॉफ के हरिकांत व्यास ने इनके साहित्यिक परिचय का वाचन करते हुए बताया कि मीरा आर्ची मैडम बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याति लब्ध कवयित्री हैं,इनकी पांच एकल काव्य संग्रह अंशु,रेत पर लिखा दर्द, शब्द बोलते हैं, शबनमी बूंदों की तरह, गांव की वो पगडंडियां व लगभग 50 साझा संग्रह प्रकाशित हो चुकी हैं व संस्मरण संग्रह यादों के झरोखे से प्रेस में है।इन्होंने आधुनिक आवर्त सारणी को ज्योति कलश के मटके से मैडम क्यूरी विज्ञान वाटिका में प्रदर्शित किया था व भौतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु सतत् कार्य किया ,इस हेतु 2018 में राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित हुईं, जिसमें 21हजार राशि व प्रमाण पत्र दिया गया।

बच्चों को राज्य स्तरीय नाटक, चित्रकला और विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी में पहुंचाने में इनकी अहम् भूमिका रही, स्वयं भी तात्कालिक भाषण में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांकेर जिले का प्रतिनिधित्व की, अंतर्राज्यीय भ्रमण में धर्मेंद्र साहू व राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर क्रिकेट में आकाश राणा ने प्रतिनिधित्व किया, जिसके कारण इन्हें 2022में राज्य शिक्षक स्मृति (गजानन माधव मुक्तिबोध) सम्मान से सम्मानित किया गया, जिसमें 50 हजार की राशि व प्रमाण पत्र दिया गया।

सर्जना महिला साहित्य समिति कांकेर द्वारा साहित्य सृजन शिखर सम्मान 2023 से सम्मानित हुईं, जिसमें 5000/- मोमेंटो व सम्मान पत्र ज्योतिष मनीषी डॉ गीता शर्मा द्वारा दिया गया।इसके अतिरिक्त कबीर मठ दिल्ली द्वारा कबीर कोहिनूर सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय समता साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा एपीजे अब्दुल कलाम सम्मान 2022से सम्मानित हुईं।इसके अलावा लगभग 300 प्रमाण पत्र विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों द्वारा प्राप्त है।

आप विभिन्न राज्य व जिला स्तरीय मंचों में मंच संचालन करती रहीं। जिला स्तरीय राज्योत्सव, कला उत्सव व 15अगस्त,26 जनवरी के कार्यक्रमों में इन्होंने मंच संचालक व सांस्कृतिक प्रभारी के रुप में महती भूमिका निभाई।बच्चों से इन्हें अत्यधिक लगाव था।उनके सर्वांगीण विकास हेतु इनकी भूमिका अग्रणी रही ।बागवानी में इनकी विशेष रुचि थी। सांस्कृतिक, साहित्यिक व विज्ञान के क्षेत्र में इनके द्वारा किए गए कार्य अविस्मरणीय रहेंगे।प्राचार्य अर्चना शुक्ला ने उनके सक्रियता की प्रशंसा की। सांस्कृतिक प्रभारी व्याख्याता दिव्या परतेती ने कहा कि मीरा दीदी विपरीत परिस्थितियों में भी इस मुकाम पर हैं, जो हमारे लिए प्रेरणा है। टेकाम मैडम ने मैडम के नेतृत्व में स्कूल में होने वाले विविध आयोजनों को याद किया।नव पदस्थ रसायन विषय के व्याख्याता संजय कोडोपी ने भी संबोधित किया। पूजा सिन्हा मैडम ने जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मुकाम –गीत गाकर सबको भावविभोर कर दिया।

आर्ची मैडम ने डुमाली के अपने कार्य काल को स्वर्णिम कार्यकाल कहा। उन्होंने कहा -धरती पर यदि कहीं स्वर्ग है तो वह डुमाली में है। सबको आभार व्यक्त करते हुए बागवानी में अपने लगाये पौधों के साथ छायाचित्र लेते हुए भाव विभोर हुईं।डुमाली के लिए हमेशा समर्पित रहने का वादा कर विदा लीं।उन्हें अंत में मोमेंटो व उपहार देकर विदाई दी गई।इस अवसर पर शाला परिवार पूनम देवांगन, प्रीति पैकरा, के.के.नेताम, संजय कोडोपी,बिसाहिन टेकाम,खेमानंद साहू, चांदनी मोटवानी,अल्का ठाकुर,निर्मला हिडको,सुन्हेर मंडावी, प्रकाश चंदेल ,रोहित मंडावी , दुर्गेश यादव व समस्त बच्चे उपस्थित थे।






