(मनोज जायसवाल)
—पुलिस की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच तमाम जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में संपन्न होता है‚उत्सव।
कांकेर(सशक्त पथ संवाद) कांकेर जिले का ऐतिहासिक अरौद दशहरा उत्सव जो कि आज 04 अक्टूबर को आयोजित था। खराब मौसम,बारिश को देखते हुए एक सप्ताह आगे बढाते हुए आगामी 11 अक्टूबर दिन शनिवार को मनाया जायेगा। रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। लोकप्रयाग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन था,जिसे भी निरस्त किया गया है।अब दूसरा सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। आज दशहरा समिति एवं समस्त ग्रामवासियों की उपस्थिति में यह निर्णय लिया गया है।
वीडियो—ग्राम अरौद की मीटिंग में दशहरा समिति के अध्यक्ष अपनी बात रखते हुए।
महीने भर से होती है,तैयारी
जिले का अरौद दशहरा उत्सव जहां रावण का दहन पूरी तरह इलेक्ट्रानिक पद्वति से दहन होता है, आतिशबाजियों से पूरा मैदान आसमान तक नहायी होती है,इसका गवाह बनते हैं,दूर-दूर से आने वाले दर्शक इसके साथ दमदार कथानक का पाठ करते स्थानीय कलाकार ही इस दशहरा की खुबियां होती है। इस दशहरा उत्सव में युं तो काफी खर्च भी होता है‚लेकिन अभी तक शासन प्रशासन से वित्तीय सहयोग नहीं मिलता।
ग्राम की एकता के कायल
जिले के तमाम जनप्रतिनिधी जो स्वयं इस दशहरा उत्सव में आने के इच्छुक होते हैं। उन्हें चारामा विकासखंड के स्वावलंबी ग्राम अरौद दशहरा की एकता,यहां की पारंपरिक संस्कृति लुभाती है। यह 86 वां वर्ष है,जब दशहरा उत्सव मनाते आ रहे हैं, प्रति वर्ष होने वाले आयोजन में क्षेत्रीय विधायक की हमेशा उपस्थिती होती है।
वीडियो—ग्राम अरौद की मीटिंग में ग्राम पंचायत के सरपंच अपनी बात रखते हुए।
सभी संसाधन गांव के
अरौद ऐतिहासिक दशहरा उत्सव पूरे तन,मन,धन के साथ ग्रामवासी मनाते हैं,इसमें पूरा संसाधन गांव की अपनी होती है। रावण के विशाल पुतले बनाने में भी अत्याधुनिक रूप से युक्ति अपनाई गई है,जिसका कंकाल लोहे से बनाया गया है। कलाकार की बात करें तो स्थानीय है, कलाकारों में प्रमुख रूप से रावण- ललित पटेल, कुंभकरण-शिव रजक, मेघनाथ-सुनील पटेल, विभीषण महेश्वर पटेल। राम-पूरण पटेल,लक्ष्मण-कौशल पटेल,हनुमान-स्वरूप निषाद,सीता माता-टिकेश्वर पटेल, ऋषि- बलिहारी गजेंद्र, संचालक-रजनु निषाद इस आयोजन के वो कलाकार है‚जिनकी बदौलत कार्यक्रम आज इतना लोकप्रिय है। चिंताराम साहू‚ श्रवण मरकाम‚ गोवर्धन पटेल‚चंदु पटेल‚गोवर्धन पटेल‚छबि‚सुरेश पटेल के साथ संगीत जगत के दिलीप विश्वकर्मा‚ पंकज साहू‚ कृष्णा विश्वकर्मा अपनी संगीत साधना से आयोजन को सुरमयी बनाते हैं। समस्त ग्रामवासियों की एकता का प्रतिफल है कि इतने बडे आयोजन यहां सम्पन्न होता आ रहा है।






